गुलाल और अबीर के प्यार की कहानी

अबीर अरबी में खुशबू है

मनमोहक महकते फूलों की

गुलाल रंग है मात्र 

अबीर बांग्ला में लालिमा है

ढलती शबनमी शाम की

गुलाल रंग है मात्र 

अबीर में अहम् है

अर्थ की गूढ़ता का

गुलाल रंग है मात्र 

होली पर एक कहानी 

प्यार की पूरी होती है

गुलाल और अबीर की

जब अबीर , गुलाल हो जाता है |

फिर नहीं बचता 

प्यार में अहम्

फिर हर शब्द का 

एक ही अर्थ होता है

गुलाल होती है

खुशबू और लालिमा

और अबीर, गुलाल संग

रंग मात्र हो जाता है |

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चाँद और प्यार 

‘प्यार चाँद की तरह होता है, जब बढ़ता नहीं है, तब घटने लगता है’
गाड़ी का शीशा नीचे करते हुए स्मिता बोली “देखो! वो चाँद है क्या?वाह! इतना बड़ा है और इतना सुंदर। आज लिखो न चाँद पर कुछ!” 

बड़े से चाँद की एक-दो कहानियाँ स्मिता को सुनाने के बाद मैंने लालघाटी में चढ़ते चाँद को देखा। वाकई में बहुत बड़ा और सुंदर था – बिलकुल प्यार की तरह! 

मेरे प्यार की कहानी का शीर्षक सोचकर हंसी आ गई – प्यार, चाँद की तरह होता है, जब बढ़ता नहीं है, तब घटने लगता है। खैर, आज शाम क्षितिज की सीढ़ियों से ऊपर चढ़ता चाँद किसी महंगे रेस्तरां की छप्पनभोग थाली जैसा दिख रहा था। प्यार भी कुछ पूनम के नए चाँद जैसा होता है – भावनाओं के छप्पनभोग में होता है ज़िन्दगी का खट्टा – मीठा स्वाद। नया नया चाँद, नया नया प्यार, छप्पनभोग थाली, उफ्फ ये हार्मोनल गश!

मैं चाँद के खूबसूरत क्रेटर्स देख ही रही थी कि एक और ख्याल आया – जो लोग चाँद की रोशनी को देखकर हैरान होते हैं, वो जानते ही नहीं कि चाँद खुद रोशन नहीं होता, वह सूरज की रोशनी को प्रतिबिंबित करता है- ठीक प्यार की तरह, जिसमें चमक है मेरी चमक से, प्यार में फूल तभी खिलते हैं जब मेरे जज्बातों की बारिश होती है, प्यार में सबकुछ अच्छा लगता है क्योंकि मैं खुश हूँ। मेरा प्यार मेरी आत्मा का प्रतिबिंब है।

चाँद चढ़ चुका है आसमान में। अब दिखाई नहीं दे रहा खिड़की से। पर देख रही थी चाँद को चढ़ते हुए और घटते हुए। प्यार को भी देखा है – चढ़ते, बढ़ते, घटते और डूब जाते हुए। 

अरे हाँ! प्यार इस मामले में भी चाँद के समान है कि वह भी चाँद की तरह मेरी कहानी का मेहमान है और कैलेंडर की तारीखों का हिसाब रखते हुए चला जाएगा और फिर आएगा नया चाँद। 

नींद खुल गई है। घर आ गया है। अलविदा बड़े चाँद!

हथेलियों पर किस्मत 

के प्रिंटर से छपी 

भाग्य रेखा 

जहाँ खत्म होती थी 

वो मंज़िल

बड़ी फीकी थी ।

और मैं ठहरी

मीठे की शौकीन

उम्मीद थी ही नहीं 

प्यार से प्यार मिलने की 

तो रास्तों से 

दोस्ती कर ली ।

किस्मत का कैलकुलेटर 

बड़ा सही हिसाब 

रखता है 

सुनहरा सफर

फीकी मंज़िल में 

यादों की मिश्री 

घोलता है ।

A Gift or A lesson!

Picture Credit : Smita’s Craft Hut

Dear Arthur


Life is awesome here. I hope wherever you are , you are spreading whatever you have there too. Hopefully the positivity and not your illogical attitude towards Life! I know I haven’t written to you in months but today when I was scrolling through the pages of my digital diary , I found this and I was compelled to write to you. It was My last year’s Secret Letter to Santa on Christmas.

Here with this mail i am attaching that letter. Hey! I know you don’t feel even tad guilt for whatever happened, so please don’t even try to throw tantrums that I am trying to make you feel bad. I am writing this letter with an intention to make you feel even worse ( not just bad ).



The disappeared scars were fresh back then when I was writing this letter, I remember . I had thought you were a gift but No! You were a lesson. I always knew Life had better plans for me. Just wanted to say thanks. Thank You Arthur ! for you were the one because of whom I learnt what betrayal is. You were full package of betrayal in yourself. So, it kinda saved a lot of my precious time. Now I don’t need to know the different kinds of betrayals from different persons. You betrayed me in millions of ways. 


But I have always loved surprises, and so all was welcome, even a dagger in disguise of love. And I have learnt by heart whatever was taught to me from last Christmas season to this. 


You know Arthur! Sun still rises in the east and sets in the west , I am still awed by nature , Music still soothes me , I still believe in Love and I still smile.Because I have got a Life , I choose what to do with it. I chose you to be a lesson and now I dump you in the dustbin. You do deserve a better place but believe me you do not deserve a Bliss. And my life is heaven in itself ! So you are not welcome.


Eternally Mine

Shivani

अच्छा लगता है !

अच्छा लगता है 
पंछियों को आज़ाद करके 

पिंजरा छोड़ जब वो

उड़ते हैं ऊपर 

डैने नापते हैं अपने 

और नापते हैं 

आसमान की ऊंचाई ।

अच्छा लगता है 

उन्हें ऊंचा उड़ता देख

दूर जाता देख।

पिंजरा था आशाओं का 

जंजीरें थी उम्मीदों की

जो गले पर कसती थी 

प्यार के नाम पर ।

अच्छा लगता है 

पिंजरे का ताला खोल

पंछी को 

दरवाज़े तक आता देख ।

पंछी के दिल में था 

राजकुमारी के लिए प्यार 

और थी चाहत 

ऊंचा उड़ने की ।

अच्छा लगता है 

आज़ादी की चाहत को 

जीतता देख

प्यार को हारता देख ।

राजकुमारी के नंगे पाँव पर

महसूस होती है 

भट्टी की आग।

अच्छा लगता है 

प्यार के पिंजरे के 

लोहे को पिघलता देख।